मनुष्य शरीर प्राप्त करकेभी, यदि जीव भगवानके श्रवण, वर्णन और संस्मरण आदिके द्वारा भगवानका भजन नहीं करते तो जीवों का श्वास लेना धौंकनीके समान ही सर्वथा व्यर्थ है।

Dr.Om Sharma

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